मेरी अभिलाषा भाग २
काश ऐसा सच हो जाएं
जैसा मैं चाहूं वैसा हो जाएं
बेटियों को पराया कर दिया जाता है
ये बड़ा अन्याय
बेटियां तो बाबा की रानी होती है
ना करो बाबा अब पराय
काश ऐसा सच हो जाएं
जैसा मैं चाहूं वैसा हो जाएं
फिर खेलूं वैसे ही जैसे बचपन में खेला करती थी
अम्मा की लोरी से जैसे पहले सोया करती थी
घर अंगना तो खिला हुआ था
बेटी की किलकारी से
बेटी गई पराये घर तो
सुना पड़ा है घर आंसू से
काश ऐसा सच हो जाएं
जैसा मैं चाहूं वैसा हो जाएं
अब ना मिलेगा कभी वैसा जीवन
जहां छोड़ आएं हम अपना बचपन
काश ऐसा सच हो जाएं
जैसा मैं चाहूं वैसा हो जाएं।
मेरा सपना पूरा हो जाएं
मेरा बचपन मुझे वापस मिल जाएं।
समाप्त