तेरी सीरत साफ़ शीशे की तरह
मेरे दामन में दाग हज़ारों हैं
तूँ नायाब किसी पत्थर की तरह
मेरा उठना-बैठना बाज़ारों में है
मैंने खोया है अपनी हर प्यारी चीज को
मैं अपनी किस्मत फिर भी आज़माउंगा
इस ज़मीन पर कोई ख़ास है नहीं मेरा
तूँ कुबूल करे मैं अपने गवाहों को आसमान से बुलाऊंगा