नंगे पांव चलता रहूंगा कांटे भरी राहों में ,,,,
आखिर कब तक?
लोगों की बाते सुनकर खुद को कोसता रहूंगा ,,
आखिर कब तक ?
मंजिल पाने को दौड़ता रहूंगा मृग की भांति ,
आखिर कब तक?
मेरी तुलना कई लोग दूसरों से करते रहेंगे ,,,
आखिर कब तक ?
मेरा वजूद भी किसी के होने से पहचाना जायेगा ,,
आखिर कब तक ?
राम के होते भी रावण को हर बार पूजा जाता है ,,
आखिर कब तक ?
मन के भावों को हटाकर खुद को चुप करवायेगा तू ,,,
आखिर कब तक ?
दबता रहेगा जालिम दुनिया के शब्दों से तू,,
आखिर कब तक ?
आखिर कार अखरेगा तुझे आखरी समय तेरा,,
आखिर कब तक ?
नंदी❤️