मायूस जिंदगी(शीर्षक)
ना जाने किस घड़ी में मुकद्दर लिखा गया।
हिस्से में मेरे गम का समंदर लिखा गया।
मायूसियों में डूब के बेहाल हो गये
दर्द और गम का कैसा ये मंजर लिखा गया
ना जाने.........।
टूटे हुए इस दिल को भला चैन क्योँ मिले।
खुशियो को बस नसीब में पलभर लिखा गया।
ना जाने.......।
बर्बादियों में उम्र ये ढलती चली गई
इस जिंदगी को मौत से बदतर लिखा गया।
ना जाने........।
शिकवा जो हम करे तो वो मालिक से क्या करें?
सारे जहाँ में मुझको ही कमतर लिखा गया।
ना जाने......।