हाँ! हमने माना कि,
हम ज़माने के न हो सके
किंतु ज़माने में भी,
हम जैसा हो न सका कोई।
तुम कहते तो, हम जरुरठहर जाते
किंतु तुम हीं आगे बढ गए
तो हम आखिर ठहरकर क्या करते।
ख्याल आया था,
चलो याद का पाषाण हो जाते है
किंतु मुक्क्दर में लिखा था, धूल होने का
तो याद का फूल कैसे हो जाते।
अब ये सब छोङो
ये बता इतने दिनों बाद,
हम याद आए तो आए कैसे
मरघट के बादल पनघट पर पहुंचे तो पहुंचे कैसे।
अब ये मत कहना
प्यासे को देखकर मन भर आया है तुम्हारा
किंतु शायद तुम्हें मालूम नहीं
अब हम प्यास के हीं प्यासे है
अपने जिंदगी के हम सबसे सुनहरे किस्से है।
#अनंत