Hindi Quote in Poem by Pallavi Saxena

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प्रतियोगिता के सागर में

सपनों की एक छलांग लगी

कुछ डूब गए, कुछ तैर गए

करनी आती थी जिनको कोशिश

किसी तरह वह तैर गए

डूबे थे कभी वो भी पर

कोशिश करने से उबर गए

लेकर अपने साहसों की कश्ती

किनारे पर वो उतर गए

कुछ चले थे तबियत से उड़ने

पर गिरके धरा पर टूट गए

कुछ लड़े झगड़े हालातों से

कुछ फिर भी सिंहर

कर बिखर गए

कुछ डरे सहमें और

कुछ हिम्मत करके कूद गए

सपने, सपने ना हुए मानो

जैसे कोई जुर्म हुआ

जो पूरे ना हुए तो मानो कोई

एक खून हुआ

और तुम ने

उसको ही सच जान लिया

वही सच था यह मान लिया

अरे एक नहीं कई सारे हैं वो

आकाश में बिखरे तारे है वो

क्या हुआ जो कुछ टूट गए

कुछ छूट गए

सपने तो आखिर सपने है

जीने की उम्मीदें है

इन्हें सहेजो इन्हें सवारों

तन मन धन से इन्हें पुकारो

सपने ही तो हैं

देखना एक दिन पूरे होंगे....पल्लवी

Hindi Poem by Pallavi Saxena : 111917825
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