तलाश
कहां हो तुम
कौन जाने कहाँ हो तुम
ऐसा तो तय नहीं था
कुछ कहना न सुनना
और हो जाना गुम
कहाँ हो तुम
किस से पुछूं कौन बताए
कौन सफर पे निकले तुम
तय हुआ था मिल कर चलना
फिर क्यों अकेले निकले तुम
जीवन साथी थे हम दोनों
कसम थी साथ निभाने की
क्यों राह में छोड़ अकेला
अपनी राह पे निकले तुम
यादें तेरी लिपट के मुझ से
मुझको बहुत रुलाती हैं
कभी रात को जगा जगाकर
तुझसे मुझे मिलाती हैं
कब तक होगा छुप छुपकर मिलना
सामने क्यों नहीं आती तुम
कहाँ हो तुम कहाँ हो तुम
😭😭😭😭😭