अपनी आदतें सब बदलने लगी हुँ,
दुनिया के रंग में जरा ढलने लगी हुँ।
साथी संगत कि जरूरत थी पहले!
बेफिक्र अब अकेले चलने लगी हुँ।।
ये दुनिया अपनी लगती थी पहले,
अब खुद के लिए जिंदगी जीने लगी हुँ।
हाँ अब हर दर्द मुस्कुरा के पीने लगी हुँ!
जिंदगी बेधड़क होके जीने लगी हुँ।
अपनी आदतें सब बदलने लगी हुँ,
दुनिया के रंग में जरा ढलने लगी हुँ।।