तुम मेरी बाँहों की ओर आते हो
मेरी बाँहें छोटी पड़ जाती हैं,
तुम मेरी हँसी के साथ हँसते हो
मेरी हँसी छोटी हो जाती है,
तुम मेरे कदमों की ओर चलते हो
मेरे कदम छोटे हो जाते हैं,
तुम मुझसे आँख मिलाते हो
मेरी आँखें डगमगाने लगती हैं,
तुम प्रणाम मुझे करते हो
मेरा प्रणाम झुक जाता है,
तुम मेरे साथ-साथ रहते हो
मेरा साथ बड़ा हो जाता है।
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** महेश रौतेला