अवेद्यमेकं यदनन्यवेदिनां कुतार्किकाणां च सुवेद्यमन्यथा ।
निरीक्ष्य चेत्थं त्वगुणग्रहोऽगुणं न याति मोहं ग्रहदोषमुक्तितः ॥
मुह में बाजा ताजन्म ईब बनायरी उबासी अधरंग
मदिरा पान सुरसरी, पेट सेट और कलुआ फिरंग
भगत सिंह न डॉ साहेब पे बेच रहया नित ईमान
कमबख्त इणाने इब बख्स दे, नकारा और बईमान
खांड चाब, आंसू पूंछे और बनावटी शक्ल
दवा दारू चाट करगा, तिहाड़ा जाये अक्ल
माहपुरूषा के नाम पे, रोजा खाव खसम
तस्वीरा इण हाथ सू झुठी रेल पेल रसम
मोहब्बत री लुटी कहानी पी रोये
खसम बनावे रोज यो,दारू शाम होवे
गिलासा अब हर रोज, पैग ईब जोवे
सुबह मंदिरा शाम मदिरा मालई बटोरे
कह कविराज सुनरे कागा तिहाड़ा मोहे
Corruption is like a mosquito, it sucks the blood of common man.