बिछाई है शतरंज की चाल।
संभल जाओ छल होने वाला है।
कई इस में फंस चुके।
कुछ थोड़े या ज्यादा।
सबके इरादे नेक ना हो।
ओ मासूम बिटिया।
अब नहीं है कान्हा।
ऐसी बिछाई शतरंज की चाल।
बचे ना कोई छल के पार।
इस छल में फंसी द्रौपदी।
अपनों ने ही दाव पे लगाया।
लगाई पुकार माधव को।
अब ना रहा माधव जो बचाए छल से।
खुद ही संभल जाना।
छल होने वाला है।
🙏🙏