वो मुलाकात उससे आखरी थी मेरी,,
जब वो कहता रहा ,"मुझे जाने न दे,,
बस एक बार रुक ले मुझे,,
और हम उसे जाते हुए रोक ना सके,
हाथों में उसके मेरा हाथ था, जो उसने और कस कर पकड़ लिया,,
जैसे जानते हो वो की हम से फिर कभी नही मिलेंगे हम,,
आंखो में दर्द था , जो बह निकला आंसू बन कर,
और हम बस देखते रहे कुछ न कहा ,ये भी न कह सके रो मत हम है तुम्हारे साथ ,जल्द मिलेंगे परेशान क्यों हो,,
बस देखते रहे हम उन्हे दूर जाते हुए , और वो अपने दर्द को आंसुओ में छिपाते रहे,,
कितनी इल्तिज़ा की उसने हम से,,
की रोक ले हम,
वो अपना चेहरा छुपाए रोते रहे,
और हम दूर होते उन्हे देखते रहे ,,
और दिल ये कर रहा था की सीने से लगा ले उन्हे कभी जाने न दे खुद से दूर ,पर हम कर न सके,
कई बार रास्ते से फोन भी किया उन्होंने की रोक लो ना मुझे ,,
पर वो उनकी बेहतरी के लिए जरूरी था ,और उन्हे जाने दिया ,
वो मलाल आज भी है हमें, पर ये जरूरी नही की जो हासिल हो वही प्यार हो ,,वो आज हमारे साथ नही इसका गम है,,पर उन्हें याद रोज़ करते हैं,,दिल से दुआ निकलती है उनके लिए ,,वो जहां हो हिफाजत से हों,,
वो आखरी मुलाकात आज भी याद है हमें,
जब उन से बिछड़े थे फिर कभी ना मिलने के लिए,,
यूं तो मुलाकाते अभी होती है उनसे रोज़ ही,,
वो हमे वैसे ही आंसू बहाते हुए ही मिलते हैं पर अब गुस्सा होते है और सीने से भी लग जाते बेधड़क,अब उन्हें कोई डर या शर्म नही ,,
बस ये सब अब हमारे तस्सुवर में होता ,,
वो उन से आखरी मुलाकात याद है हमें,,...---अन्जू