कोनोकार्पस वृक्ष( बटनवुड):
हम अपने वृक्ष के लिए
दो शब्द न कह पायं
दो शब्द न लिख पायं,
हम इतने कृतघ्न तो नहीं हो सकते
कि जो वृक्ष सालों से सामने था,
आक्सीजन दे रहा था
हरियाली ला रहा था,
छायावादी बना था
अखबार ने अचानक उसे
रोगकारक घोषित कर
खलनायक बना दिया।
हाँ सरकार ने जरूर कहा
"इसका विकास सीमित( ट्रीमिंग) किया जाय"
तब मैंने सोचा
ओ शाम मुझे तंग मत कर
मैं जहाँ पसरूँ
निराकार हो जाऊँ,
जहाँ बैठूँ
गुनगुनाने लगूँ।
** महेश रौतेला