ये इश्क मुश्क ना मुझे कभी समझ ही नही आते।
क्या है ये? क्यों है ये? किस लिए है ये?
यूं तो इश्क मुझे एक छलावा सा नजर आता है।
चार दिन की चांदनी फिर गौर अंधेरा।
क्या कोई कभी कर सकता है सिर्फ किसी की रूह से इश्क।
रूह से रिश्ता जो होता है वो कभी भी शरीर को पाना नहीं चाहता है।
रूह से रूह का नाता अब कहा होता है,
आज कल का इश्क तो मानो चंद मिनटों में होता है फिर खत्म भी हो जाता है।
पहले लोग जब emotionally attached होते थे तो Detached होने की उनको जरूरत नहीं होती थी।
"लोग पहले रिश्ते इसीलिए जोड़ते थे क्यों की उन्हे किसी का साथ चाहिए होता था, और अब साथ रहेने के लिए नही किंतु अपनी कुछ वक्त का अकेलेपन दूर करने वास्ते रिश्ते बनाए जाते है"
वो इश्क का दौर बड़ा सही था।
लोग अपनी मन की बाते खत के द्वारा पहिचाते थे।
जब दूसरा इंसान खत को पठ रहा होता था, तब उस इंसान को खत लिखने वाले का चहेरा उस खत में दिखता था।
अपने सामने आते तो अपनी आंखे भी नही मिला पाते थे, अगर गलती से एक दूसरे का हाथ स्पर्श हो गया तो,
दोनो उलटी दिशा में नजरे गुमा लिया करते थे।
Ufffff ये शर्म.......
आज इश्क तो ऐसा नही है।
आज इश्क कही ना कही status देखने से ही हो जाया करता है।
किसी की शकल से तो किसी के पैसे से तो किसी के पावर से।
कुछ वक्त तक सब सही जाता है , बहुत जल्द ही दिल टूट भी जाता है।
लेकिन लेकिन लेकिन.......
ये जितना जल्दी दिल टूट जाने की दुहाही दी जाती है, मेरा दोस्त उसे ज्यादा जल्दी लोग move on कर जाते है।
पहले के इश्क में कोई move on नही कर पाता था, और इसी लिए तो शारूख ने बोला था की "हम एक ही बार जीते है, एक ही बार करते है और ये जो इश्क है वो भी सिर्फ एक ही बार होता है" ये तो हुई 90s के दौर की बात है। पर जब शाहरुका इश्क 2000 की साल में प्रवेश किया तो बोला इश्क कामिना है।😜😂
आज कल किसी के भावना के साथ खेल खेलना मानो आम सी बात हो चुकी है, हर आए दिन कोई न कोई तुम्हारे साथ mind games खेलता हुआ नजर आता है। अपने कुछ वक्त के EGO satisfy करने के लिए किसी के दिल के साथ खेल जाते है।
वो दौर अलग था जब लोग इश्क में तेरे नाम के सलमान खान बन जाया करते थे, लेकिन आज कल के इश्क में तू नही तो कोई और सही मेरी सोनिए।😂
पहले का इश्क में एक emotional connection हुआ करता था।
और आज के इश्क में एक Selfishness होता है।