दोहे
मंजीर
ठुमक-ठुमक कर चल रही,बजते है मंजीर।
राधा रानी राधिके, बँधा जाओ धीर।।
मेदिनी
पूज रहे हैं मेदिनी,देती हमें अनाज,
जिसके कारण बदलता , जीवन का अंदाज।।
बारूद
आज नहीं हम कह सके,उससे अपनी बात।
बारूद वह उगल रहा,बदल गई औकात।।
चीवर
चीवर कितने बदलते,मत बदलो ईमान।
नहीं रहेगा पास कुछ,घट जाएगा मान।।
कलिका
कलिका रौंदी ही गई ,सुनी सभी ने चीख।
कोई नहीं गया वहां , मांग रही थी भीख।।
डॉ भावना शुक्ल 🙏