सब के अपने सत्य है; सब के अपने है जूठ,
कैसा अप्रिय सत्य है ; कैसा प्रिय हैं जूठ,
सब कुछ एक जैसा ही है; जब अपने जाए रुठ।
सब के अपने गुन है; सब के अपने है रुप,
कैसा अप्रिय गुन है ; कैसा प्रिय हैं रुप,
सब कुछ एक जैसा ही है; जब मिल जाए रुह।
सब के अपने आँसू है; सब की अपनी है हँसी,
कैसा अप्रिय आँसू है ; कैसा प्रिय हैं हँसी ,
सब कुछ एक जैसा ही है; जब मिल जाए सुकून।
सब के अपने दायरे है; सब की अपनी है राहे,
कैसा अप्रिय दायरा है ; कैसी प्रिय हैं राहे,
सब कुछ एक जैसा ही है; जब दिख जाए मंजिल।
सब की अपनी नफ़रते है; सब का अपना है प्यार,
कैसी अप्रिय नफ़रत है ; कैसा प्रिय हैं प्यार ,
सब कुछ एक जैसा ही है; जब टूटे चाहत का ख्याल।
सब की अपनी सोच है; सब के अपने है विचार ,
मिलजुलकर रहना सीखे; यही जीवन का सार।।। RV👑