लगता हैं
किसी बाधा में कैद हूँ
नहीं घर आने का वक़्त तय
किसे पता कहाँ रुके थे
आख़री बार मेरे कदम
ईश्वर का दोषी मयख़ाने
की ओट का सहारा लेना
हृदय में सन्नाटा मन
अशांत आँखें उदास
कविताओं में कहीं न कही
व्याकरण की कमी
तुम आकर पूछलों न
मुझ से आख़िर बात क्या हैं
निक राजपूत