याद आते हो तुम
ख़याल में भी आते हो तुम,
हर सवाल में भी आते हो तुम,
जब जब पूँछू अपने मन से मैं,
हर जवाब में भी आते हो तुम,,
भोर की पहली किरण में आते हो तुम ,
साँझ की ढलती रोशनी में नज़र आते हो तुम,
अरे अब क्या क्या कहें हम ,
चाँदनी रात में नज़र आते हो तुम ,,
साँसो में नज़र आते हो तुम,
धड़कनों में बस जाते हो तुम ,
रूह में शामिल इस कदर हो गए हो ,
अब तो मेरी ज़िंदगी नज़र आते हो तुम ,,
हवा की छुवन में आते हो तुम ,
बारिश की बूँदों में छू के जाते हो तुम
जैसे तड़प जाती है मीन बिन पानी के ,
वैसे ही सताते हो तुम ,,,
हाँ बहुत याद आते हो तुम,,,,,,,,