जख्म गहरा था।
उसने पूछा नहीं हमने बताया नहीं।
कुछ ना समझे वह अगर इसमें खता मेरी कहां।
हाले दिल हमने कभी उनसे छुपाया नहीं।
जब भी तेरी याद आई तनहाई में।
कैसे कह दूं कि हमने अस्क भहाया नहीं।
अब तक प्यासी हैं आंखें मेरी तुम्हारे दीदार के लिए पर जाने वाला तो कभी लौट कर आया ही नहीं।।