कबीर दास जी के दोहे
एकही बार परखिये ना वा बारंबार।
बालू तो हु किरकिरी जो छानै सौ बार ।
साहेब बंदगी 🙏,
भावार्थ - कबीर दास जी कहते हैं कि किसी व्यक्ति को एक ही बार परख लो तो उसे बार बार परखने की आवश्यकता नहीं होती। अगर रेत को सौ बार छाना जाए तो उसकी किरकिराहट दूर नहीं होगी - इसी प्रकार किसी मूर्ख दुर्जन को बार बार भी परखो तब भी बह अपनी मूर्खता, दुष्टता से भरा वैसा ही मिलेगा। जबकि सही व्यक्ति की परख एक बार में हो जाती हैं..!!!!