सुनो
तुम पूछते थे न मुझे में तुम्हें बचपन से ही "
कैसे पसंद करने लगी थी
तो सुनों सच आज मेरी जुबां से..
बे'परवाह बे'हयाँ बे'पनाह
मुझे तुमसे इसीलिएँ प्रेम हुआ
क्यूंकि तुम मेरे मन की भाषा पढ़ते थे
आँखें में आँखें डालकर
उस वक़्त मेरी आत्मा तक छू आए थे तुम
बाकी सब मेरे तन की भाषा पढ़ते थे...
निक राजपूत -