मुहब्बत में सिर्फ एक ही शख्स अच्छा लगता है
और नफ़रत में सिर्फ एक ही शख्स बुरा, और पुरी दुनिया अच्छी लगती है
फिर कोन कहता है कि मुहब्बत अच्छी और नफ़रत बुरी है
दोनों का अपना एक अलग ही रुतबा, एक अलग ही मजा है
शर्त बस इतनी सी है कि वह दोनों सही इंसान के साथ कि जानी चाहिए