औरत
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मैं एक औरत हूं
नर में से निकाली गई हूं
इसलिए नारी हूं।
इंसानों को पैदा किया है
इसलिए उनकी मां हूं।
जबरन हैवानों की हवश बनी
इस कारण रखेल, लाचार,
कमज़ोर और बदनाम हूं।
रिश्तों को बनाया तो
बहन, भाभी, मौसी, दादी,
बुआ और नानी हूं।
फिर जब रिश्तों की डोर टूटी तो
विधवा, अनाथ,जोगन और वेश्या हूं।
धर्मों की बात करो तो
कहीं में मुंह दिखा नहीं सकती,
तो कहीं सिर उठा सकती हूँ,
क्योंकि नर पहले बना
और मैं बाद में बनी,
मगर कितने आश्चर्य की बात है कि
एक औरत के बाद ही सारी दुनिया बनी,
फिर भी औरत की जगह सदा
आदमी की ही चली।
- समाप्त।
Sharovan
from,
USA