गुरु और सतगुरु
हमारे सम्पूर्ण जीवन मे अनेको गुरू मिलते है |
यहाँ मिलना श्रेष्ठ नही अपितु आंगीकार करना है |
प्रकृति के कण -कण में गुरू तत्व समाहित है ,
एक शिशु से लेकर बालक तक गुरु हो सकता है ,
किन्तु सतगुरू का सम्बन्ध आत्मा से है जो सदा ही एक
है निश्चित है | गुरु मुँख है और सतगुरू स्थिति ,आचरण |