ढूंढ लें कुछ सीपियां
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चलो सागर के किनारे, कुछ सीपियाँ ढूंढेगे,
अगर नहीं मिलेंगी तो निराश होकर लौट आएंगे।
हर बार की तरह इस बार भी ऊंचा उड़ने की कोशिश कर लें,
फिर गुलेलें तनी ज़माने की तो लौट आएंगे।
घर से निकले थे बड़े ही बे आबरू होकर, याद है,
जब बुलाया है फिर से चलो मिल कर लौट आएंगे।
वह राह ए सफर में चलते हुए छोड़ गए तन्हा हमें,
सोचते होंगे कि हम भी उनके पास लौट आएंगे।
चलो दरिया के किनारे , याद करेंगे कुछ बीते लम्हों को,
बैठकर रोयेंगे, तड़पेंगे और आंसू बहाते लौट आएंगे।
जिंदा हैं कितने लोग मुहब्बत किए बगैर, कहा किसी ने,
जब वे सुनेंगे तो क्या वे भी फिर से लौट आएंगे?
समाप्त।
Sharovan.