सादर समीक्षा हेतु प्रस्तुत हैं, पाँच दोहे 🙏🙏🙏
*दोहा सृजन हेतु शब्द--*
*आभार,ज्वार,सुकुमार,पुलकन,चितवन*
1 आभार
सबके प्रति आभार है, दिखलाई जो राह।
कवितातल तक जा सका,नाप सका कुछ थाह।।
2 ज्वार
ज्वार बाजरा खाइए, मिटें उदर के रोग।
न्यूट्रीशन तन को मिले, होता उत्तम भोग।।
3 सुकुमार
बाल्यकाल सुकुमार है, रखें सदा ही ख्याल।
संस्कारों की उम्र यह, होता उन्नत भाल।।
4 पुलकन
मन की पुलकन बढ़ गई, मिली खबर चितचोर।
बेटी का घर आगमन, बाजी ढोलक भोर ।।
5 चितवन
चितवन झाँकी राम की, राधा सँग घनश्याम।
आभा मुख की निरखते, हृदय बसें श्री राम।।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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