सावन की पहली बरसात जैसी है,
एक लड़की बिलकुल चांदनी रात जैसी है...
जुल्फें खोलकर वो जब पलके झुकाती है,
सांसे तो चलती है पर जान निकल जाती है...
कत्ल करने को उसकी सूरत बहुत है,
थोड़ी गुस्सैल है पर खूबसूरत बहुत है...
तू आंखे खोले तो दिन खिले बंद करे तो रात हो,
झटककर खोले जुल्फें अपनी तो बिन मौसम बरसात हो..
तू मुस्कुरा दे तो पत्थर भी पिघल जाए,
हाथ लगा दे तो हर ज़ख्म संवर जाए...
किसी शायर की बेहतरीन कलाम सी है,
वो जैसी भी है पर लड़की बड़ी ख़ास सी है...