बचपन, खुशियों का समय
विचारों से पहले, निर्मलता का अवसर।
जीवन की जटिलताओं से अगर
कुछ प्रश्न आते थे, तब भी था तो कुछ अधूरा।
खेलने के दिन, दोस्तों और खिलौनों के साथ
सुखद और खुश, बिना किसी शोर शराबा।
कल्पनाएँ भटकती हुई, अनंत सपनों से भरी
समुद्री डाकू, राजकुमारी या खिलौनों के जमाने की यादें भरी।
बचपन की यादों के साथ
मन आज भी तरंगित है।
वो खुशी और निराशा की बारिश
जो दिल को अभी तक तरसती है