तपती धूप में भीनी पुरवाई है माँ!
सर्द रातों में गर्म रजाई है माँ !!
रह न जाए कहीं ईश्वर की कमी !
बस यूं ही सृष्टि ने बनाई है माँ !!
माना कि कभी-कभार डांटती भी है !
पर हर हाल में मीठी रसमलाई है माँ !!
इस जहां में कुछ नहीं जो माँ न कर सके!
बड़ी ही जादूगरी-करिश्माई है माँ !!
जब कभी लड़खड़ाते हमारे कदम!
हाथ थामे खड़ी नजर आई है माँ !!
और क्या-क्या लिखूं है बहुत कुछ यहाँ!
मेरी खाली कमल की रोशनाई है माँ !!
अभी लिए इतना ही, धन्यवाद!😊