इस मन को समझाने और समझने के लिए दो अलग अलग विकल्प ही क्यों चुनने होते है क्या कभी इसे दुख और अभी सुखा के बीच के सफर की अनुभूति नहीं होती है कुछ पाने की फिर पा कर के खो देने की तशाली करते है एक प्रेम में पड़ी प्रेमिका के संदर्भ में ये सब बाते तब तक ही सहनुभूति दिलाती है जब वो प्रेम के रूप में उभर उभर के दिल बेताबियो से हिचकोले मरते रहे
hmm...
तब अपने मुद्दे पे आते है बहुत वक्त बिता दिए कुछ शब्द इस पन्नो पे नही उतारे कुछ जुगलबंदी नही किए तो सोचा कुछ लिख ही लेते है
यू ही जिंदगी के उसी पड़ाव में आ के बस ठहर सी गई हू सब चीजे सिर्फ गंभीरता और संतुष्टि के रूप में मिलने लगे हैं कुछ खतम हो रहा है कुछ चंचलता और कुछ चंचलता में छिपी मासूमियत
दिल भी शांत हो गया है जैसे इसके कोई अपने की हत्या हो गई है
भावुक मन भी मरणो उपरांत बस किसी के चले जाने के और उसके वापस न आने के विचारो को त्याग कर बस शांत सा एक नई सी खोज में लीन होने के लिए कुछ चीजों को समेट रहा है
कभी सब कुछ अच्छा पाना कभी कुछ भी न पाने में जूझ रहा है सिर्फ शांत ही भी इस्थिर भी हो गया है पता nhi क्या पा गया है
बस आगे का फिर कभी सुनाएगे ......
एक सोच ... बदलाव...#Teenage 🫠