कई बार रिश्ते खराब होते देखे है मैने........
पर लगता था की शायद लोगो को निभाना नहीं आता.......
पता तो तब चला जब खुद के साथ वही हुआ.......
और अपनो ने भी पराए जैसा मान लिया.......
बस कान्हा अब इस दुनिया से फर्क कम पड़ने लगा है......
क्योंकि सब रिश्तों को मैने रेत की तरह अपने हाथ से निकलते देखा है............