आशा
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चिंदी----चिंदी
हुआ मन
थोड़ी सी
चिकुटी सी चुभन
भीतर से
बाहर की ओर आती सिहरन
सपनों से बातें करता
एकाकीपन
जंगल के भीतर रास्तों पर
मिली भ--ट--क--न
जीवन के
सत्य से हुई धड़कन
सब--कुछ
घोल--घोलघालकर
पीला दिया है तुम्हें
एक कटोरे में
अब देखें ---
मीरा का प्याला बन ये
कैसे देता है तुम्हें
अमरत्व ----!!
डॉ. प्रणव भारती