🙏🏼सादर नमन और वंदन 🙏🏼
श्लोक
चंचलं हि मनः कृष्ण,
प्रमाथि बलवद्दृढम् ।
तस्याहं निग्रहं मन्ये,
वायोरिव सुदुष्करम्। ।
श्रीमद्भगवद्गीता -६ -३४
अर्थात :
हे श्रीकृष्ण! यह मन बड़ा चंचल, उथल-पुथल स्वभाव वाला, बड़ा दृढ़ और बलवान है।
इसलिए उसको वश में करना मैं वायु को रोकने की भाँति अत्यन्त दुष्कर मानता हूँ।
सारांश - सफलता की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को मन को शांत रखते हुए लक्ष्य प्राप्ति हेतु सतत प्रयत्नशील रहना चाहिए।
The mind is very restless, turbulent, strong and obstinate.
O Krishna ! It appears to me that it is more difficult to control the mind, than that of the wind.
Gist- People aspiring to succeed in every Himalayan Task, must learn to control the mind and to continue focusing in the mission with grit ,determination and zeal.
आपका दिन मंगलमय और आनंदमय हो, सद्भावपूर्ण अंतःकरण से हार्दिक अनंत शुभ कामनाएं ।
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