सभी मित्रों को स्नेहपूर्ण मंगलकामनाएँ।💐ईश्वर की विश्व पर अनुकंपा बनी रहे। प्रकृति के अंग हम सब उसकी छुअन से सदा आप्लावित रहें। ब्रह्मांड के प्रति नमन करते हुए सदा सर्वे भवंतु सुखिनः की भावना से सराबोर रहें। कुछ कर सकें ऐसा जो फ़िज़ाओं में घुलकर स्नेह का अंबर तान दे।जाने के बाद भी स्नेह छुअन सबमें छोड़ जाएँ।
रूठों को भी चलो मना लें
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नए साल के नए तराने ,
रूठों को भी चलो ,मना लें....
पूरी हों सबकी अभिलाषा
संबंधों की सुमधुर भाषा
सबके मन में उपजे करुणा
स्नेहसिक्त जन-मन हर्षा लें....
रूठों को भी चलो मना लें -----
प्रश्न यहाँ पर बहुत विकट हैं,
चारों ओर पले संकट हैं,
मुस्कानें किसमें मैं बाँटू
कोई तो झोली फैलाए,
स्नेह-प्रेम से गले लगाएँ
मन की भाषा से हर्षा लें...
रूठों को भी गले लगा लें ----
मन प्यारा हो ,हो जग प्यारा,
मन में न होवे अंधियारा,
साँस-साँस में स्नेह बसा हो,
प्रेम-भाव सबमें सरसा हो
आओ सब मिल ज्योत जला लें...
रूठों को भी चलो मना लें ------||
सभी मित्रों को नव-वर्ष की शुभेच्छाएँ💐
सस्नेह
डॉ प्रणव भारती