कविता
लो जिंदगी का एक और साल कम हो चला
कुछ यादें ले चला कुछ पीछे छोड़ चला,
कुछ ख्वाहिशे दिल में रह गई
कुछ कुछ बीना मांगे मिल गई,
कोई छोड़ कर चला गया
कोई नया सफ़र में जुड़ गया,
कोई बहुत नाराज़ रहा
कोई बहुत खुश हुआ,
कोई मिलकर भूल गया
कोई आज भी याद करते चला,
किसी को आज भी इंतजार रहा
किसी का इंतजार खत्म हो चला,
कोई बहुत परेशान रहा
कोई बहुत खुशगवार रहा,
ग़लती हुई, होती रही, जाने अंजाने,
कुछ अच्छा हुआ,कुछ बुरा हुआ,
दोस्तों! गुज़र गया ये बरस भी
ओर बरस भी गुजरते ही रहेंगे,
आना जाना तो रहेगा दोस्तों,
जो मिला पल खुशी भर के जीओ,
न जाने कब बदल जाए
बरस की तरह यह पल भी।
कहीं खुशी है, कहीं व्यथा है
यहां तो हर चहेरे पर एक कथा है।
रचना:अज्ञात
नूतन वर्ष की शुभकामनाएं ।
BVR
🌹🙏🏻🌹