क्या आपको पता है कि चोट के घाव तो मिट जाते है लेकिन अपने मुख से कहीं गई बात से लगे घाव कभी नही मिटते।
उन्हे मिटने के लिए प्रेम की आवश्यकता क्योंकि प्रेम मुक्ति का मार्ग हैं।
एक बहुत सुंदर दोहा है कबीर दासजी का
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।
agreed ?