कर्मों की गति
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न्यारी न्यारी कर्मों की गति न्यारी न्यारी
ऊपर से बातें लच्छों सी,मन में छिपी कटारी
कर्मों की गति.......
जो हमने बोला काटेंगे,यही परीक्षा हमारी
गंगा जमुना तीर खड़े हों ,फिर भी प्यासे खड़े भिखारी
कर्मों की गति........
संस्कार का ओढ़ दुशाला ,गले लटकती रुद्र की माला
किंतु समर्पित मनवा न हो ,तब कैसे गति होय हमारी----
कर्मों की गति -----
डॉ.प्रणव भारती