कल कल बहता पानी बन जा
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प्रेम. प्रीत के गीत गुनगुना
सबकी राम कहानी बन जा
दिशा दिशा में तम पसरा हैं
रोशन कर जग दानी बन जा
बाँँट सुगंध सभी में ऐसी
प्रचलित एक कहानी बन जा
तन माटी में मिल जाएगा
तू हर मन की वाणी बन जा
बरसा प्यार जगत भर में तू
चूनर रंग ले धानी बन जा
कल कल बहता पानी बन जा
सबकी राम कहानी बन जा....
डॉ प्रणव भारती