आज़ादी के अरमानों की जलती चिता देखो,
रावण की लंका में कैद पड़ी माता सीता देखो।
अधर्मी बैठ गए है देश के उत्तम सिहासन पर,
उसके वध के लिए भगवान कृष्ण की गीता देखो।।
आज गिधो का विधान है मांसाहार बांध करो,
हमको देश की सत्ता चाहिए, आप भूखे मरो।।
बीच दिया दारू की बोटल में अपना एक वोट,
भ्रष्ट व्यवस्था मिली तो बोले सिंहासन खाली करो।
आज़ादी की दुल्हन को कोठे पे बेच दिया है,
हमने सत्तर साल में यही काम तो किया है।
अपने हाथ को बंध करना, तू शुद्ध गुलाम हो,
ओर वोट देने का पैसा भी तुम्ही ने तो लिया है।।
यह गुलामी की प्रथा भी कितनी न्यारी है,
गुलामी तुमको अपनी जान से भी प्यारी है।
राष्टगान उसी को बना दिया रहनुमाओं तुमने,
जिस गीत ने ज्योज पंचम की आरती उतारी है।।
तलवारो से लड़ने वाली दुर्गा रानी चाहिए अब,
भगत, राजगुरु, आज़ाद की जवानी चाहिए अब।
बहुत देख लि फिल्मो में हमने जिस्म अंगड़ाई,
करे असुरो का वध वो माता भवानी चाहिए अब।।
ड्रग्स के नशे में धूम रहा है आज मेरे देश युवान,
पूत बन गए है कपूत अब क्या करे वो भगवान।
अभिव्यक्ति का नकाब पहनके द्रोही नारे लगाते है,
तुम काट दो जुवान जो करे द्रोहीओ का सन्मान।।
मनोज अब क्या करे जब देश की जनता नामर्द हो,
जी हुजूम जी हुकुम मत बोली गुलामी की हद हो।
में बार बार बोलता हूं, मेरा प्यार मेरा भारत देश है,
हो अगर जन्म अगला, तो नशीब में मेरे सरहद हो।।
मनोज संतोकि मानस