हमसे क्या,ये ज़माना चाहता है
हर शख्स उसे, पाना चाहता है
क्या दिख रहा है आईने में मुझे
क्या आइना दिखाना चाहता है
वही करता है रोशनी मेरे घर में
वही चिराग़, बुझाना चाहता है
वही दिखाता है ख़्वाब दिल को
वही मुझको, जगाना चाहता है
वही बना रहा है, घर मेरे लिए
वही तो आग,लगाना चाहता है
Akash Gupta ✍️✍️