Hindi Quote in Quotes by Dr Jaya Shankar Shukla

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*कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके।*
*राम लखन सम प्रिय तुलसी के॥*
*बरनत बरन प्रीति बिलगाती।*
*ब्रह्म जीव सम सहज सँघाती॥2॥*

भावार्थ:-
ये कहने, सुनने और स्मरण करने में बहुत ही अच्छे (सुंदर और मधुर) हैं, तुलसीदास को तो श्री राम-लक्ष्मण के समान प्यारे हैं। इनका ('र' और 'म' का) अलग-अलग वर्णन करने में प्रीति बिलगाती है (अर्थात बीज मंत्र की दृष्टि से इनके उच्चारण, अर्थ और फल में भिन्नता दिख पड़ती है), परन्तु हैं ये जीव और ब्रह्म के समान स्वभाव से ही साथ रहने वाले (सदा एक रूप और एक रस),॥2॥

*नर नारायन सरिस सुभ्राता*।
*जग पालक बिसेषि जन त्राता॥*
*भगति सुतिय कल करन बिभूषन।*
*जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन॥3॥*

भावार्थ:-
ये दोनों अक्षर नर-नारायण के समान सुंदर भाई हैं, ये जगत का पालन और विशेष रूप से भक्तों की रक्षा करने वाले हैं। ये भक्ति रूपिणी सुंदर स्त्री के कानों के सुंदर आभूषण (कर्णफूल) हैं और जगत के हित के लिए निर्मल चन्द्रमा और सूर्य हैं॥3॥

*स्वाद तोष सम सुगति सुधा के।*
*कमठ सेष सम धर बसुधा के॥*
*जन मन मंजु कंज मधुकर से।*
*जीह जसोमति हरि हलधर से॥4॥*

भावार्थ:-
ये सुंदर गति (मोक्ष) रूपी अमृत के स्वाद और तृप्ति के समान हैं, कच्छप और शेषजी के समान पृथ्वी के धारण करने वाले हैं, भक्तों के मन रूपी सुंदर कमल में विहार करने वाले भौंरे के समान हैं और जीभ रूपी यशोदाजी के लिए श्री कृष्ण और बलरामजी के समान (आनंद देने वाले) हैं॥4॥

दोहा :
*एकु छत्रु एकु मुकुटमनि*
*सब बरननि पर जोउ।*
*तुलसी रघुबर नाम के*
*बरन बिराजत दोउ॥20॥*

भावार्थ:-
तुलसीदासजी कहते हैं- श्री रघुनाथजी के नाम के दोनों अक्षर बड़ी शोभा देते हैं, जिनमें से एक (रकार) छत्ररूप (रेफ र्) से और दूसरा (मकार) मुकुटमणि (अनुस्वार) रूप से सब अक्षरों के ऊपर है॥20॥
*🚩जय श्री सीताराम जी की*🚩

Hindi Quotes by Dr Jaya Shankar Shukla : 111836201
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