विषय त्याग बैराग है, समता कहिये जान ।
सुखदायी सब जीव सों, यही भक्ति परमान ।।
कबीर दास जी संसारी जीवो को सन्मार्ग की शिक्षा देते हुए कहते है की पाचो विषयों को त्यागना ही वैराग्य है । भेद भाव आदि दुर्गुणों से रहित होकर समानता का व्यवहार करना ही परमज्ञान है और स्नेह , उचित आचरण भक्ति का सत्य प्रमाण है । भक्तों में ये सद्गुण विद्यमान होते है ।