लगाव।
हेलो दोस्तो केसे हो आप सब? क्या हाल बाठिया।आज में। बड़े ही मजेदार विषय पे बात करना चाहती हू। वैसे विषय तो आप समझ ही गए होगे क्यों? 😜
बात है लगाव की। लगाव क्या होता है, यह एक तरह से मोह ही होता है। लगाव हमे कब होता है जब हमें वो चीज पसंद आती है,और हमारा मन उसके पास रहना चाहता है।लगाव हमे लोगो से, और बेजान चिजो से भी होता है अक्सर।
हमारा बचपन जहा बिता हो, वह आंगन से हमें बेइंतहा लगाव होता है। जिन गालियों में दौड़ते थे, साइकल चलाई होगी, उन बात को याद करते ही, उस रास्ते , उस गालियों से हमारा नाता हमे याद आ जाता है। यह नाता कभी न टूटने वाला होता है। यह भी तो एक लगाव ही हूवा।
यह लगाव से हम उम्रभर के लिए जुड़े हुवे रहते है।
ऐसा कौनसा लगाव है जिसे इंसान कभी छूटना ही नहीं चाहता है। वो है रिश्तों का लगाव , रिश्तों से उमींदे।
एक रिश्ता थोड़ा सा जुड़ता है वही उमिंदो का लिस्ट पता नई क्यों इतना लंबा हो जाता है। एक रिश्ते में कितनी उम्मीद रखना हमे दुखी नई करता।
दोस्ती।
चलिए बात करते है दोस्ती के रिश्ते की। यह रिश्ता सच्चा होता है, यह रिश्ते में इंसान कभी बनावटी रह ही नहीं पता केसे वो जानते है।
१. दोस्ती में शर्त नहीं होती पर उम्मीद बराबर की होती है।
२.दोस्ती ही ऐसा रिश्ता है जिसमे हम अपना मन बिंदास सामनेवाले के सामने खोल सकते है।
३.दोस्ती ही ऐसा रिश्ता है जिसमे हम अपने दोस्त पे बेवजह गुस्सा भी कर सकते है, कभी कभी न बोलनेवाली बाते बोल जाते है।
४. दोस्ती के रिश्ते को इतना संभालना नही पड़ता क्यों की, रिश्तेदारों के सामने हमे बनावटी होना पड़ता है, एक दोस्त होता है जो हमारी रग रग से वाकिफ होता है।
५. दोस्ती में माफी आसानी से और दिल से मिल जाती है,बाकी रिश्तों में एक भूल कर दी रिश्ता खत्म हो जाता है।
७.पर दोस्ती तो ऐसी होती ही नहीं। दोस्ती में बार बार गलती करो, दोस्तो को ताने मारो जब तक मन न भरे उसे नाराज रहो कितना भी एक दोस्त EGO नही रखता है, वो सामने से तुम्हे मनाता है।
८. दोस्ती में हक भी है और सुकून भी है, यह एक ऐसा रिश्ता है जिसके सामने तुम तुम हो सकते हो।
दोस्ती का लगाव भी कभी नहीं टूटता। यह रिश्ता उम्रभर दिल में यादें बनाए रखता है। वह इंसान हमारे जीवन में रहे या ना रहे पर यह रिश्ता कभी नही मरता।
यह लगाव हमे खुदको बहेतर बनता है। हमारी सेहत के लिए यह लगाव जरूरी होता है।
जो लगाव हमे बरबाद करते है।
*इश्क*
+दुनिया का कोई भी जज्बा जब हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो वो नुकसानदाई होता है, चाहे वो "इश्क" ही क्यों ना हो।
अति तो कभी सही होती ही नहीं।