एक बार फिर बारिश की बूंदे बरसी है, आंखे फिर तुझे देखने को तरसी है,
इन आसुओ को मत देखा कर, दिल के सिवा दिखते सारे रास्ते फर्जी है ।
येह दिल वो हर पल का कर्ज़ी है, जिस दिन से तेरा नाम मेरे नाम से कागज़ों में दर्ज ही है।
जिश्म के हर एक अंग में तू ही बसी है, एक बार फिर बारिस बरसी है।
तू मान न मान ये तो खुदा की मर्ज़ी है, तभी तो येह बादलो की बारात खड़ी है,
दिखती बिजली बादलो के बीच हमारी मिलन कि मुजहीर है, एक बार फिर बारिस की बूंदे बरसी है।