“लोहा जितना तपता है, उतनी ही ताकत भरता है।
सोने को जितनी आग लगे, वो उतना प्रखर निखरता है।।
हीरे पर जितनी धार लगे, वो उतना खूब चमकता है।
मिट्टी का बर्तन पकता है, तब जाके धुन पर खूब खनकता है।।
सूरज जैसा बनना है, सूरज जितना जलना पड़ेगा.....
सूरज जैसा बनना है, सूरज जितना जलना पड़ेगा।
नदियों सा आदर पाना है, तो पर्वत छोड़ निकलना होगा।।
और हम महादेव के चेले हैं.....
और हम महादेव के चेले हैं, क्यों सोचे राह सरल होगा।
कुछ ज्यादा वक्त लगेगा, पर संघर्ष जरुर सफल होगा।।
हर एक संकट का हल होगा, आज नहीं तो कल होगा।” - © जतिन त्यागी