कभी -कभी मुझे ऐसा लगता है ,
जैसे तुम मुझमे बदलाव देखने आते हो !
यह तुम्हारे इंतजार पर मेरा आना तुममे
निराशा उत्पन्न कर रहा है , इसीलिए हर
दिन एक कोशिश मेरी इस आदत को छुड़ाने की,
जैसे कि तुम कह रहे हो तेरा बदलाव ही तेरी पहली
सीढ़ी है | मगर ! फिर भी मैं उन शब्दों को संजोये इस
समझ को अनदेखा कर जाती हूँ जिसमे कहा था तुमने
"तुम मेरा इंतजार करोगी न ?" तुम्हारे अतिरिक्त मुझे कोई बंधन बाँध नही सकता बाँधा गया जबरदस्ती तो
तोड़ दूँगा | " सबकुछ बदल गया इन शब्दों के भी मायने भी जहाँ तुमने सहज , सहर्ष स्वीकृति से बँधना स्वीकार किया | तुम्हारी प्रसन्नता ,तुम्हारा सहज परिवर्तन जीवन की सुन्दरतम छवि जिसमे शायद मेरा अंश नही जैसे कह रहा हो मुझसे अब तू भी "बदल जा ! " मेरे लिए बदलाव से अधिक तुम्हारी इच्छा महत्व रखती है , मंजिल से अधिक रास्ता महत्व रखता है | ....अंश से