रामायण भाग - 33
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कुम्भकरण का वध (दोहा - छंद)
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कुम्भ करण जब ना उठा, मंगाये पकवान।
महक भोज्य की सूंघ कर, जागा वह बलवान।।
कथा हरण की जब सुनी, जाने जब हालात।
समझाया लंकेश को , पर ना माना बात।।
कुंभकर्ण लड़ने चला, आया सीना तान।
मन में सब हैं जानता , नहीं बचेगी जान।।
युद्ध किया श्री राम ने, कुंभकर्ण के साथ।
एक बाण में सिर गिरा, कटे पाँव औ हाथ।।
कुंभकर्ण तब गिर पड़ा, लगा उसे जब बाण।
राम नाम लेते हुए , निकले उसके प्राण।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित