तुम्हारा बार - बार मुझे दृश्य दिखाना ,
मुझे लगता है कि यह तुम्हारा कुठाराघात है
मुझमे विश्वास की कमजोर शाख पर | मगर !
सुनो ! यह दृश्य तो बाहरी है इसका आघात तो केवल मेरी आँखों,
मेरी हृदय को पीड़ित करता है विश्वास तो अन्तर में शान्त ,निश्चल बैठा है | वह जहाँ है वहाँ उसे कोई हिला नही सकता क्योंकि वह वहाँ तुम्हारे साथ ही तो है |
.....अंश से