तिरंगे का संदेश
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आजादी का अमृत महोत्सव है
इसे हर्षोल्लास से मनाएं,
सबसे प्यारा अपना तिरंगा
बड़ी शान से लहरायें।
परंतु अब समय आ गया है
हम औपचारिकताओं से बाहर आ जायें,
तिरंगे के संदेश को जीवन में
उतारने का संकल्प करें,
राष्ट्र, राष्ट्रीयता और खुद से
अगर इतना ही प्यार है
तो तिरंगे के संदेश का अनुसरण करें,
राष्ट्र, समाज के साथ अपना भी
जीवन खुश हाल करें,
जिम्मेदार नागरिक हैं तो
आखिर दिखना भी तो चाहिए
सिर्फ बकवास और आडंबर न करें।
सबसे ऊपर केसरिया पट्टी
साहस, सहानुभूति का प्रतीक है
हम इसे जीवन में उतारें,
सफेद पट्टी शान्ति का संदेश गुनगुनाए
हरी पट्टी वृद्धि समृद्धि उर्वरता का
गीत संगीत सुनाए।
इतना ही नहीं है ऐ मेरे देशवासियों
सफेद पट्टी में नीले रंग का अशोक चक्र
चौबीस तीलियों से सुसज्जित
जीवन दर्शन का भान कराए,
हर तीली की विशेषता या संदेश
यदि हम सब जीवन में उतार पायें
तो सच मानिए आप सब
राष्ट्र का कल्याण और विकास को
समृद्धि और खुशहाली के पंख लग जाएं।
हमारा खुद का जीवन ही नहीं
हमारा परिवार भी
सदा हँसे और मुस्कराए।
आप भी आज इन तीलियों का
मन लगाकर संदेश सुनिए
मनन कर जीवन में उतारिए।
सिर्फ राष्ट्र आपका है
इस भ्रम से बाहर निकलिए,
हर एक तीली का एक एक संदेश
संयम, त्याग, आरोग्य, शान्ति,
प्रेम, शील, सेवा, क्षमा सिखाए,
मैत्री, बंधुत्व, संगठन संग
कल्याण भाव की बात बताए,
समृद्धि, उद्योग ,सुरक्षा सहित
नियमों संग जीना सिखलाए।
समता, नीति, अर्थ, न्याय
सबके हित में है बतलाए,
कर्तव्य और अधिकार सभी के
बुद्धिमत्ता सहित सहकार्य की
नित स्वर लहरी गुंजाए।
आज जरूरत है इसकी
तो कुछ कर्तव्य हमारा भी है।
इन चौबीस संदेशों को हम
पहले जीवन में उतार लें
फिर कहें ये देश हमारा है
तिरंगा हमें प्राणों से प्यारा है
हमारा भारत इस जहाँ में
सबसे सुंदर, सबसे न्यारा
क्योंकि ये भारत, ये तिंरगा हमारा है।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक, स्वरचित