कुछ उलझे तो हैं
पर सुलझने की भी चाह नहीं
डर है की सब कुछ और न उलझ जाए
डर है की सब कुछ खो न जाए
डर तो है पर डरते भी नही
सब सुना तो है पर हम अकेले भी नही
लोग साथ तो है पर कोई अपना भी नही
अकेले रहना तो है पर मन लगता भी नही
लोग सुनते तो है पर समझते नही
जानते तो है पर समझते भी नही